Daily Baba ki murli

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*_21-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - याद में रहकर हर कर्म करो तो अनेकों को तुम्हारा साक्षात्कार होता रहेगा''*_

_*प्रश्नः-*_ संगमयुग पर किस विधि से अपने हृदय को शुद्ध (पवित्र) बना सकते हो?

_*उत्तर:-*_ याद में रहकर भोजन बनाओ और याद में खाओ तो हृदय शुद्ध हो जायेगा। संगमयुग पर तुम ब्राह्मणों द्वारा बनाया हुआ पवित्र ब्रह्मा भोजन देवताओं को भी बहुत पसन्द है। जिनको ब्रह्मा भोजन का कदर रहता वह थाली धोकर भी पी लेते हैं। महिमा भी बहुत है। याद में बनाया हुआ भोजन खाने से ताकत मिलती है, हृदय शुद्ध हो जाता है।

*_धारणा:-_* किसी भी बात की फिकरात नहीं करनी है क्योंकि यह ड्रामा बिल्कुल एक्यूरेट बना हुआ है। सभी एक्टर्स इसमें अपना-अपना पार्ट बजा रहे हैं।

_*वरदान:-*_ नि:स्वार्थ और निर्विकल्प स्थिति से सेवा करने वाले सफलता मूर्त भव

सेवा में सफलता का आधार आपकी नि:स्वार्थ और निर्विकल्प स्थिति है। इस स्थिति में रहने वाले सेवा करते स्वयं भी सन्तुष्ट और हर्षित रहते और उनसे दूसरे भी सन्तुष्ट रहते। सेवा में संगठन होता है और संगठन में भिन्न-भिन्न बातें, भिन्न-भिन्न विचार होते हैं। लेकिन अनेकता में मूंझो नहीं। ऐसा नहीं सोचो किसका मानें, किसका नहीं मानें। नि:स्वार्थ और निर्विकल्प भाव से निर्णय लो तो किसी को भी व्यर्थ संकल्प नहीं आयेगा और सफलता मूर्त बन जायेंगे।

_*स्लोगन:-*_ अब सकाश द्वारा बुद्धियों को परिवर्तन करने की सेवा प्रारम्भ करो।
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*_20-10-2019 अव्यक्त 24-02-85 हिन्दी मुरली सार_*

_*संगम युग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग*_

एक बेहद के बाप के बनने के कारण सारे विश्व की आत्माओं से सम्पर्क हो गया। बेहद के परिवार के हो गये। विश्व की सर्व आत्माओं से सम्पर्क बन गया। तो चारों ही बातें अविनाशी प्राप्त हैं इसलिए सदा सुखी जीवन है। प्राप्ति स्वरूप जीवन है। अप्राप्त नहीं कोई वस्तु ब्राह्मणों के जीवन में। यही आपके गीत हैं। ऐसे प्राप्ति स्वरूप हो ना वा बनना है? तो सुनाया ना आज प्राप्ति स्वरूप बच्चों को देख रहे थे। जिस श्रेष्ठ जीवन के लिए दुनिया वाले कितनी मेहनत करते हैं। और आपने क्या किया? मेहनत की वा मुहब्बत की? प्यार-प्यार में ही बाप को अपना बना लिया। तो दुनिया वाले मेहनत करते हैं और आपने मुहब्बत से पा लिया। बाबा कहा और खजानों की चाबी मिली।

_*वरदान:-*_ शुद्ध और समर्थ संकल्पों की शक्ति से व्यर्थ वायब्रेशन को समाप्त करने वाले सच्चे सेवाधारी भव

कहा जाता है संकल्प भी सृष्टि बना देता है। जब कमजोर और व्यर्थ संकल्प करते हो तो व्यर्थ वायुमण्डल की सृष्टि बन जाती है। सच्चे सेवाधारी वह हैं जो अपने शुद्ध शक्तिशाली संकल्पों से पुराने वायब्रेशन को भी समाप्त कर दें। जैसे साइंस वाले शस्त्र से शस्त्र को खत्म कर देते हैं, एक विमान से दूसरे विमान को गिरा देते हैं, ऐसे आपके शुद्ध, समर्थ संकल्प का वायब्रेशन, व्यर्थ वायब्रेशन को समाप्त कर दे, अब ऐसी सेवा करो।

_*स्लोगन:-*_ विघ्न रूपी सोने के महीन धागों से मुक्त बनो, मुक्ति वर्ष मनाओ।
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*_19-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - देही-अभिमानी बनने की प्रैक्टिस करो, इस प्रैक्टिस से ही तुम पुण्य आत्मा बन सकेंगे''*_

_*प्रश्नः-*_ किस एक नॉलेज के कारण तुम बच्चे सदा हर्षित रहते हो?

_*उत्तर:-*_ तुम्हें नॉलेज मिली है कि यह नाटक बड़ा वन्डरफुल बना हुआ है, इसमें हर एक एक्टर का अविनाशी पार्ट नूँधा हुआ है। सब अपना-अपना पार्ट बजा रहे हैं। इस कारण तुम सदा हर्षित रहते हो।

*_धारणा:-_* सर्विसएबुल फूल बनना है। देह-अभिमान वश ऐसा कोई कर्म नहीं करना है जो डिससर्विस हो जाए। बहुतों के कल्याण के निमित्त बनना है। थोड़ा समय याद के लिए अवश्य निकालना है।

_*वरदान:-*_ पवित्रता के वरदान को निजी संस्कार बनाकर पवित्र जीवन बनाने वाले मेहनत मुक्त भव

कई बच्चों को पवित्रता में मेहनत लगती है, इससे सिद्ध है वरदाता बाप से जन्म का वरदान नहीं लिया है। वरदान में मेहनत नहीं होती। हर ब्राह्मण आत्मा को जन्म का पहला वरदान है "पवित्र भव, योगी भव''। जैसे जन्म के संस्कार बहुत पक्के होते हैं, तो पवित्रता ब्राह्मण जन्म का आदि संस्कार, निजी संस्कार है। इसी स्मृति से पवित्र जीवन बनाओ। मेहनत से मुक्त बनो।

_*स्लोगन:-*_ ट्रस्टी वह है जिसमें सेवा की शुद्ध भावना है।
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*_18-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - ऑर्डर करो कि हे भूतों तुम हमारे पास आ नहीं सकते, तुम उनको डराओ तो वह भाग जायेंगे''*_

_*प्रश्नः-*_ ईश्वरीय नशे में रहने वाले बच्चों के जीवन की शोभा क्या है?

_*उत्तर:-*_ सर्विस ही उनके जीवन की शोभा है। जब नशा है कि हमें ईश्वरीय लॉटरी मिली है तो सर्विस का शौक होना चाहिए। परन्तु तीर तब लगेगा जब अन्दर कोई भी भूत नहीं होगा।

*_धारणा:-_* कर्मभोग की बीमारी वा माया के तूफानों में मूँझना वा हैरान नहीं होना है। बाप ने जो ज्ञान दिया है उसे उगारते बाप की याद में हर्षित रहना है।

_*वरदान:-*_vसर्व संबंधों की अनुभूति के साथ प्राप्तियों की खुशी का अनुभव करने वाले तृप्त आत्मा भव

जो सच्चे आशिक हैं वह हर परिस्थिति में, हर कर्म में सदा प्राप्ति की खुशी में रहते हैं। कई बच्चे अनुभूति करते हैं कि हाँ वह मेरा बाप है, साजन है, बच्चा है...लेकिन प्राप्ति जितनी चाहते हैं उतनी नहीं होती। तो अनुभूति के साथ सर्व संबंधों द्वारा प्राप्ति की महसूसता हो। ऐसे प्राप्ति और अनुभूति करने वाले सदा तृप्त रहते हैं। उन्हें कोई भी चीज़ की अप्राप्ति नहीं लगती। जहाँ प्राप्ति है वहाँ तृप्ति जरूर है।

_*स्लोगन:-*_ निमित्त बनो तो सेवा की सफलता का शेयर मिल जायेगा।
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*_16-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - आत्मा से विकारों का किचड़ा निकाल शुद्ध फूल बनो। बाप की याद से ही सारा किचड़ा निकलेगा''*_

_*प्रश्नः-*_ पवित्र बनने वाले बच्चों को किस एक बात में बाप को फालो करना है?

_*उत्तर:-*_ जैसे बाप परम-पवित्र है वह कभी अपवित्र किचड़े वालों के साथ मिक्सअप नहीं होता, बहुत-बहुत पोड (पवित्र) है। ऐसे आप पवित्र बनने वाले बच्चे बाप को फालो करो, सी नो ईविल।

*_धारणा:-_* सर्विस में बड़ा एक्यूरेट रहना है। दिन-रात सर्विस की उछल आती रहे। सर्विस को छोड़ कभी भी आराम नहीं करना है। बाप समान कल्याणकारी बनना है।

_*वरदान:-*_"पहले आप'' के मंत्र द्वारा सर्व का स्वमान प्राप्त करने वाले निर्माण सो महान भव

यही महामंत्र सदा याद रहे कि "निर्माण ही सर्व महान है''। "पहले आप'' करना ही सर्व से स्वमान प्राप्त करने का आधार है। महान बनने का यह मंत्र वरदान रूप में सदा साथ रखना। वरदानों से ही पलते, उड़ते मंजिल पर पहुंचना। मेहनत तब करते हो जब वरदानों को कार्य में नहीं लगाते। अगर वरदानों से पलते रहो, वरदानों को कार्य में लगाते रहो तो मेहनत समाप्त हो जायेगी। सदा सफलता और सन्तुष्टता का अनुभव करते रहेंगे।

_*स्लोगन:-*_ सूरत द्वारा सेवा करने के लिए अपना मुस्कराता हुआ रमणीक और गम्भीर स्वरूप इमर्ज करो।
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*_15-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - सतगुरू की पहली-पहली श्रीमत है देही-अभिमानी बनो, देह-अभिमान छोड़ दो''*_

_*प्रश्नः-*_ इस समय तुम बच्चे कोई भी इच्छा वा चाहना नहीं रख सकते हो - क्यों?

_*उत्तर:-*_ क्योंकि तुम सब वानप्रस्थी हो। तुम जानते हो इन आंखों से जो कुछ देखते हैं वह विनाश होना है। अब तुम्हें कुछ भी नहीं चाहिए, बिल्कुल बेगर बनना है। अगर ऐसी कोई ऊंची चीज़ पहनेंगे तो खींचेगी, फिर देह-अभिमान में फंसते रहेंगे। इसमें ही मेहनत है। जब मेहनत कर पूरे देही-अभिमानी बनो तब विश्व की बादशाही मिलेगी।

*_धारणा:-_* अपने आसुरी स्वभाव को बदल दैवी स्वभाव धारण करना है। एक-दो का मददगार होकर चलना है, किसी को तंग नहीं करना है।

_*वरदान:-*_ दिल में एक दिलाराम को समाकर एक से सर्व संबंधों की अनुभूति करने वाले सन्तुष्ट आत्मा भव

नॉलेज को समाने का स्थान दिमाग है लेकिन माशूक को समाने का स्थान दिल है। कोई-कोई आशिक दिमाग ज्यादा चलाते हैं लेकिन बापदादा सच्ची दिल वालों पर राज़ी है इसलिए दिल का अनुभव दिल जाने, दिलाराम जाने। जो दिल से सेवा करते वा याद करते हैं उन्हें मेहनत कम और सन्तुष्टता ज्यादा मिलती है। दिल वाले सदा सन्तुष्टता के गीत गाते हैं। उन्हें समय प्रमाण एक से सर्व संबंधों की अनुभूति होती है।

_*स्लोगन:-*_ अमृतवेले प्लेन बुद्धि होकर बैठो तो सेवा की नई विधियां टच होंगी।
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*_14-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - सर्वशक्तिमान् बाप आया है तुम्हें शक्ति देने, जितना याद में रहेंगे उतना शक्ति मिलती रहेगी''*_

_*प्रश्नः-*_ इस ड्रामा में सबसे अच्छे ते अच्छा पार्ट तुम बच्चों का है - कैसे?

_*उत्तर:-*_  तुम बच्चे ही बेहद के बाप के बनते हो। भगवान टीचर बनकर तुम्हें ही पढ़ाते हैं तो भाग्यशाली हुए ना। विश्व का मालिक तुम्हारा मेहमान बनकर आया है, वह तुम्हारे सहयोग से विश्व का कल्याण करते हैं। तुम बच्चों ने बुलाया और बाप आया, यही है दो हाथ की ताली। अभी बाप से तुम बच्चों को सारे विश्व पर राज्य करने की शक्ति मिलती है।

*_धारणा:-_* इस स्वीट संगम पर अपनी कमाई के साथ-साथ बाप की श्रीमत पर चल पूरा वर्सा लेना है। अपनी लाइफ सदा सुखी बनानी है।

_*वरदान:-*_ संगठन में रहते, सबके स्नेही बनते बुद्धि का सहारा एक बाप को बनाने वाले कर्मयोगी भव

कोई कोई बच्चे संगठन में स्नेही बनने के बजाए न्यारे बन जाते हैं। डरते हैं कि कहीं फंस न जाएं, इससे तो दूर रहना ठीक है। लेकिन नहीं, 21 जन्म परिवार में रहना है, अगर डरकर किनारा करेंगे तो यह भी कर्म-सन्यासी के संस्कार हुए। कर्मयोगी बनना है, कर्म सन्यासी नहीं। संगठन में रहो, सबके स्नेही बनो लेकिन बुद्धि का सहारा एक बाप हो, दूसरा न कोई। बुद्धि को कोई आत्मा का साथ, गुण वा कोई विशेषता आकर्षित न करे तब कहेंगे कर्मयोगी पवित्र अत्मा।

_*स्लोगन:-*_ बापदादा के राइट हैण्ड बनो, लेफ्ट हैण्ड नहीं।
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*_13-10-2019 अव्यक्त 21-02-85 हिन्दी मुरली सार_*

_*शीतलता की शक्ति*_

शीतलता की शक्ति अर्थात् आत्मिक स्नेह की शक्ति। चन्द्रमा माँ स्नेह की शीतलता से कैसे भी बिगड़े हुए बच्चे को बदल लेती है। तो स्नेह अर्थात् शीतलता की शक्ति किसी भी अग्नि में जली हुई आत्मा को शीतल बनाए सत्यता को धारण कराने के योग्य बना देती है। पहले चन्द्रमा की शीतलता से योग्य बनते फिर ज्ञान सूर्य के सत्यता की शक्ति से योगी बन जाते! तो ज्ञान चन्द्रमा के शीतलता की शक्ति बाप के आगे जाने के योग्य बना देती है। योग्य नहीं तो योगी भी नहीं बन सकते हैं। तो सत्यता जानने के पहले शीतल हो। सत्यता को धारण करने की शक्ति चाहिए। तो शीतलता की शक्ति वाली आत्मा स्वयं भी संकल्पों की गति में, बोल में, सम्पर्क में हर परिस्थिति में शीतल होगी। संकल्प की स्पीड फास्ट होने के कारण वेस्ट भी बहुत होता और कन्ट्रोल करने में भी समय जाता है। जब चाहें तब कन्ट्रोल करें वा परिव-र्तन करें इसमें समय और शक्ति ज्यादा लगानी पड़ती। यथार्थ गति से चलने वाले अर्थात् शीतलता की शक्ति स्वरूप रहने वाले व्यर्थ से बच जाते हैं। एक्सीडेंट से बच जाते।

_*वरदान:-*_ एक बाप को कम्पैनियन बनाने वा उसी कम्पन्नी में रहने वाले सम्पूर्ण पवित्र आत्मा भव

सम्पूर्ण पवित्र आत्मा वह है जिसके संकल्प और स्वप्न में भी ब्रह्मचर्य की धारणा हो, जो हर कदम में ब्रह्मा बाप के आचरण पर चलने वाला हो। पवित्रता का अर्थ है - सदा बाप को कम्पै-नियन बनाना और बाप की कम्पन्नी में ही रहना। संगठन की कम्पन्नी, परिवार के स्नेह की मर्यादा अलग चीज है, लेकिन बाप के कारण ही यह संगठन के स्नेह की कम्पन्नी है, बाप नहीं होता तो परिवार कहाँ से आता। बाप बीज है, बीज को कभी नहीं भूलना।

_*स्लोगन:-*_ किसी के प्रभाव में प्रभावित होने वाले नहीं, ज्ञान का प्रभाव डालने वाले बनो।
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*_12-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - बाप की एक नज़र मिलने से सारे विश्व के मनुष्य-मात्र निहाल हो जाते हैं, इसलिए कहा जाता है नज़र से निहाल.....''*_

_*प्रश्नः-*_ तुम बच्चों की दिल में खुशी के नगाड़े बजने चाहिए - क्यों?

_*उत्तर:-*_  क्योंकि तुम जानते हो - बाबा आया है सबको साथ ले जाने। अब हम अपने बाप के साथ घर जायेंगे। हाहाकार के बाद जयजयकार होने वाली है। बाप की एक नज़र से सारे विश्व को मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा मिलने वाला है। सारी विश्व निहाल हो जायेगी।

*_धारणा:-_* रोज़ अपनी जांच करनी है कि सारे दिन में कोई विकार ने सताया तो नहीं? कोई शैतानी काम तो नहीं किया? लोभ के वश तो नहीं हुए?

_*वरदान:-*_ सदा एक बाप के स्नेह में समाई हुई सहयोगी सो सहजयोगी आत्मा भव

जिन बच्चों का बाप से अति स्नेह है, वह स्नेही आत्मा सदा बाप के श्रेष्ठ कार्य में सहयोगी होगी और जो जितना सहयोगी उतना सहजयोगी बन जाता है। बाप के स्नेह में समाई हुई सहयोगी आत्मा कभी माया की सहयोगी नहीं हो सकती। उनके हर संकल्प में बाबा और सेवा रहती इसलिए नींद भी करेंगे तो उसमें बड़ा आराम मिलेगा, शान्ति और शक्ति मिलेगी। नींद, नींद नहीं होगी, जैसे कमाई करके खुशी में लेटे हैं, इतना परिवर्तन हो जाता है।

_*स्लोगन:-*_ प्रेम के आंसू दिल की डिब्बी में मोती बन जाते हैं।
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*_11-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - बेहद की अपार खुशी का अनुभव करने के लिए हर पल बाबा के साथ रहो''*_

_*प्रश्नः-*_ बाप से किन बच्चों को बहुत-बहुत ताकत मिलती है?

_*उत्तर:-*_ जिन्हें निश्चय है कि हम बेहद विश्व का परिवर्तन करने वाले हैं, हमें बेहद विश्व का मालिक बनना है। हमें पढ़ाने वाला स्वयं विश्व का मालिक बाप है। ऐसे बच्चों को बहुत ताकत मिलती है।

*_धारणा:-_* बाप से प्रतिज्ञा करने के बाद कोई अपवित्र कर्म तो नहीं होता है?

_*वरदान:-*_ बीती को श्रेष्ठ विधि से बीती कर यादगार स्वरूप बनाने वाले पास विद आनर भव

"पास्ट इज़ पास्ट'' तो होना ही है। समय और दृश्य सब पास हो जायेंगे लेकिन पास विद आनर बनकर हर संकल्प वा समय को पास करो अर्थात् बीती को ऐसी श्रेष्ठ विधि से बीती करो, जो बीती को स्मृति में लाते ही वाह, वाह के बोल दिल से निकलें। अन्य आत्मायें आपकी बीती हुई स्टोरी से पाठ पढ़ें। आपकी बीती, यादगार-स्वरूप बन जाए तो कीर्तन अर्थात् कीर्ति गाते रहेंगे।

_*स्लोगन:-*_ स्व कल्याण का श्रेष्ठ प्लैन बनाओ तब विश्व सेवा में सकाश मिलेगी।
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*_10-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - तुम्हारी यात्रा बुद्धि की है, इसे ही रूहानी यात्रा कहा जाता है, तुम अपने को आत्मा समझते हो, शरीर नहीं, शरीर समझना अर्थात् उल्टा लटकना''*_

_*प्रश्नः-*_ माया के पाम्प में मनुष्यों को कौन-सी इज्जत मिलती है?

_*उत्तर:-*_ आसुरी इज्जत। मनुष्य किसी को भी आज थोड़ी इज्जत देते, कल उसकी बेइज्जती करते हैं, गालियाँ देते हैं। माया ने सबकी बेइज्जती की है, पतित बना दिया है। बाप आये हैं तुम्हें दैवी इज्जत वाला बनाने।

*_धारणा:-_* सत्य नारायण की सच्ची कथा सुन नर से नारायण बनना है, ऐसा इज्जतवान स्वयं को स्वयं ही बनाना है। कभी भूतों के वशीभूत हो इज्जत गॅवानी नहीं है।

_*वरदान:-*_ बीती हुई बातों वा वृत्तियों को समाप्त कर सम्पूर्ण सफलता प्राप्त करने वाली स्वच्छ आत्मा भव

सेवा में स्वच्छ बुद्धि, स्वच्छ वृत्ति और स्वच्छ कर्म सफलता का सहज आधार है। कोई भी सेवा का कार्य जब आरम्भ करते हो तो पहले चेक करो कि बुद्धि में किसी आत्मा की बीती हुई बातों की स्मृति तो नहीं है। उसी वृत्ति, दृष्टि से उनको देखना, उनसे बोलना ...इससे सम्पूर्ण सफलता नहीं हो सकती, इसलिए बीती हुई बातों को वा वृत्तियों को समाप्त कर स्वच्छ आत्मा बनो तब ही सम्पूर्ण सफलता प्राप्त होगी।

_*स्लोगन:-*_ जो स्व परिवर्तन करता है - विजय माला उसी के गले में पड़ती है।
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*_09-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - बाप तुम्हें जो नॉलेज पढ़ाते हैं, इसमें रिद्धि सिद्धि की बात नहीं, पढ़ाई में कोई छू मंत्र से काम नहीं चलता है''*_

_*प्रश्नः-*_ देवताओं को अक्लमंद कहेंगे, मनुष्यों को नहीं - क्यों?

_*उत्तर:-*_ क्योंकि देवतायें हैं सर्वगुण सम्पन्न और मनुष्यों में कोई भी गुण नहीं हैं। देवतायें अक्लमंद हैं तब तो मनुष्य उनकी पूजा करते हैं। उनकी बैटरी चार्ज है इसलिए उन्हें वर्थ पाउण्ड कहा जाता है। जब बैटरी डिस्चार्ज होती है, वर्थ पेनी बन जाते हैं तब कहेंगे बेअक्ल।

*_धारणा:-_* सुप्रीम की पढ़ाई पढ़कर आत्मा को सुप्रीम बनाना है। पवित्रता के ही रास्ते पर चल पवित्र बनकर दूसरों को बनाना है। गाइड बनना है।

_*वरदान:-*_ विघ्नकारी आत्मा को शिक्षक समझ उनसे पाठ पढ़ने वाले अनुभवी-मूर्त भव

जो आत्मायें विघ्न डालने के निमित्त बनती हैं उन्हें विघ्नकारी आत्मा नहीं देखो, उनको सदा पाठ पढ़ाने वाली, आगे बढ़ाने वाली निमित्त आत्मा समझो। अनुभवी बनाने वाले शिक्षक समझो। जब कहते हो निंदा करने वाले मित्र हैं, तो विघ्नों को पास कराके अनुभवी बनाने वाले शिक्षक हुए इसलिए विघ्नकारी आत्मा को उस दृष्टि से देखने के बजाए सदा के लिए विघ्नों से पार कराने के निमित्त, अचल बनाने के निमित्त समझो, इससे और भी अनुभवों की अथॉरिटी बढ़ती जायेगी।

_*स्लोगन:-*_ कम्पलेन्ट के फाइल खत्म कर फाइन और रिफाइन बनो।
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*_08-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - सच्चे बाप के साथ सच्चे बनो, सच्चाई का चार्ट रखो, ज्ञान का अहंकार छोड़ याद में रहने का पूरा-पूरा पुरूषार्थ करो''*_

_*प्रश्नः-*_ महावीर बच्चों की मुख्य निशानी क्या होगी?

_*उत्तर:-*_ महावीर बच्चे वह जिनकी बुद्धि में निरन्तर बाप की याद हो। महावीर माना शक्तिमान्। महावीर वह जिन्हें निरन्तर खुशी हो, जो आत्म-अभिमानी हो, ज़रा भी देह का अहंकार न हो। ऐसे महावीर बच्चों की बुद्धि में रहता कि हम आत्मा हैं, बाबा हमें पढ़ा रहे हैं।

*_धारणा:-_* इस कयामत के समय में वाणी से परे जाने का पुरूषार्थ करना है। बाप की याद के साथ दैवीगुण भी जरूर धारण करने हैं। कोई गंदा काम चोरी आदि नहीं करना है।

_*वरदान:-*_ सदा सर्व प्राप्तियों से भरपूर रहने वाले हर्षितमुख, हर्षितचित भव

जब भी कोई देवी या देवता की मूर्ति बनाते हैं तो उसमें चेहरा सदा हर्षित दिखाते हैं। तो आपके इस समय के हर्षितमुख रहने का यादगार चित्रों में भी दिखाते हैं। हर्षितमुख अर्थात् सदा सर्व प्राप्तियों से भरपूर। जो भरपूर होता है वही हर्षित रह सकता है। अगर कोई भी अप्राप्ति होगी तो हर्षित नहीं रहेंगे। कोई कितना भी हर्षित रहने की कोशिश करे, बाहर से हंसेंगे लेकिन दिल से नहीं। आप तो दिल से मुस्कराते हो क्योंकि सर्व प्राप्तियों से भरपूर हर्षितचित है।

_*स्लोगन:-*_ पास विद आनर बनना है तो हर खजाने का जमा खाता भरपूर हो।
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*_07-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - सदा खुशी में रहो तो याद की यात्रा सहज हो जायेगी, याद से ही 21 जन्मों के लिए पुण्य आत्मा बनेंगे''*_

_*प्रश्नः-*_ तुम्हारे सबसे अच्छे सर्वेन्ट वा गुलाम कौन हैं?

_*उत्तर:-*_ नैचुरल कैलेमिटीज वा साइंस की इन्वेन्शन, जिससे सारे विश्व का किचड़ा साफ होता है। यह तुम्हारे सबसे अच्छे सर्वेन्ट वा गुलाम हैं जो सफाई में मददगार बनते हैं। सारी प्रकृति तुम्हारे अधिकार में रहती है।

*_धारणा:-_* सम्पूर्ण निर्विकारी बनने के लिए गंदी बातें न तो सुननी है, न मुख से बोलनी है। हियर नो ईविल, टॉक नो ईविल...... देह-अभिमान के वश हो कोई छी-छी काम नहीं करने हैं।

_*वरदान:-*_ वैराग्य वृत्ति द्वारा इस असार संसार से लगाव मुक्त रहने वाले सच्चे राजऋषि भव

राजऋषि अर्थात् राज्य होते हुए भी बेहद के वैरागी, देह और देह की पुरानी दुनिया में जरा भी लगाव नहीं क्योंकि जानते हैं यह पुरानी दुनिया है ही असार संसार, इसमें कोई सार नहीं है। असार संसार में ब्राह्मणों का श्रेष्ठ संसार मिल गया इसलिए उस संसार से बेहद का वैराग्य अर्थात् कोई भी लगाव नहीं। जब किसी में भी लगाव वा झुकाव न हो तब कहेंगे राजऋषि वा तपस्वी।

_*स्लोगन:-*_ युक्तियुक्त बोल वह हैं जो मधुर और शुभ भावना सम्पन्न हो।
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*_06-10-2019 अव्यक्त 18-02-85 हिन्दी मुरली सार_*

_*संगम युग तन, मन, धन और समय सफल करने का युग*_

अपना तन-मन-धन, समय कितना प्यार से सफल कर रहे हैं। पाप के खाते से बदल पुण्य के खाते में वर्तमान भी श्रेष्ठ और भविष्य के लिए भी जमा कर रहे हैं। संमगयुग है ही एक का पदम-गुणा जमा करने का युग। तन सेवा में लगाओ और 21 जन्मों के लिए सम्पूर्ण निरोगी तन प्राप्त करो। कैसा भी कमजोर तन हो, रोगी हो लेकिन वाचा-कर्मणा नहीं तो मंसा सेवा अन्तिम घड़ी तक भी कर सकते हो। अपने अतीन्द्रिय सुख शान्ति की शक्ति चेहरे से, नयनों से दिखा सकते हो। जो सम्पर्क वाले देखकर यही कहें कि यह तो वन्डरफुल पेशेन्ट है। डाक्टर्स भी पेशेन्ट को देख हर्षित हो जाऍ। वैसे तो डाक्टर्स पेशेन्ट को खुशी देते हैं, दिलाते हैं लेकिन वह देने के बजाए लेने का अनुभव करें। कैसे भी बीमार हो अगर दिव्य बुद्धि सालिम है तो अन्त घड़ी तक भी सेवा कर सकते हैं क्योंकि यह जानते हो कि इस तन की सेवा का फल 21 जन्म खाते रहेंगे। ऐसे तन से, मन से स्वयं सदा मन के शान्ति स्वरूप बन, सदा हर संकल्प में शक्तिशाली बन, शुभ भावना शुभ कामना द्वारा दाता बन सुख शान्ति के शक्ति की किरणें वायुम-ण्डल में फैलाते रहो।

_*वरदान:-*_ सेवा में विघ्नों को उन्नति की सीढ़ी समझ आगे बढ़ने वाले निर्विघ्न, सच्चे सेवाधारी भव

सेवा ब्राह्मण जीवन को सदा निर्विघ्न बनाने का साधन भी है और फिर सेवा में ही विघ्नों का पेपर भी ज्यादा आता है। निर्विघ्न सेवाधारी को सच्चा सेवाधारी कहा जाता है। विघ्न आना यह भी ड्रामा में नूंध है। आने ही हैं और आते ही रहेंगे क्योंकि यह विघ्न वा पेपर अनुभवी बनाते हैं। इसको विघ्न न समझ, अनुभव की उन्नति हो रही है - इस भाव से देखो तो उन्नति की सीढ़ी अनुभव होगी और आगे बढ़ते रहेंगे।

_*स्लोगन:-*_ विघ्न रूप नहीं, विघ्न-विनाशक बनो।
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*_05-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - बाप आया है तुम्हें गुल-गुल (फूल) बनाने, तुम फूल बच्चे कभी किसी को दु:ख नहीं दे सकते, सदा सुख देते रहो''*_

_*प्रश्नः-*_ किस एक बात में तुम बच्चों को बहुत-बहुत खबरदारी रखनी है?

_*उत्तर:-*_ मन्सा-वाचा-कर्मणा अपनी जबान पर बड़ी खबरदारी रखनी है। बुद्धि से विकारी दुनिया की सब लोकलाज कुल की मर्यादायें भूलनी है। अपनी जांच करनी है कि हमने कितने दिव्यगुण धारण किये हैं? लक्ष्मी-नारायण जैसे सिविलाइज्ड बने हैं? कहाँ तक गुल-गुल (फूल) बने हैं?

*_धारणा:-_* विकारों के वश होकर कोई भी विकर्म नहीं करना है। सहनशील बनना है। कोई भी क्रिमिनल (अशुद्ध-विकारी) आश नहीं रखनी है।

_*वरदान:-*_ मैं पन को "बाबा'' में समा देने वाले निरन्तर योगी, सहजयोगी भव

जिन बच्चों का बाप से हर श्वांस में प्यार है, हर श्वांस में बाबा-बाबा है। उन्हें योग की मेहनत नहीं करनी पड़ती है। याद का प्रूफ है - कभी मुख से "मैं'' शब्द नहीं निकल सकता। बाबा-बाबा ही निकलेगा। "मैं पन'' बाबा में समा जाए। बाबा बैंकबोन है, बाबा ने कराया, बाबा सदा साथ है, तुम्हीं साथ रहना, खाना, चलना, फिरना...यह इमर्ज रूप में स्मृति रहे तब कहेंगे सहज-योगी।

_*स्लोगन:-*_ मैं - मैं करना माना माया रूपी बिल्ली का आह्वान करना।
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*_04-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - याद की यात्रा पर पूरा अटेन्शन दो, इससे ही तुम सतोप्रधान बनेंगे''*_

_*प्रश्नः-*_ बाप अपने बच्चों पर कौन-सी मेहर करते हैं?

_*उत्तर:-*_ बाप बच्चों के कल्याण के लिए जो डायरेक्शन देते हैं, यह डायरेक्शन देना ही उनकी मेहर (कृपा) है। बाप का पहला डायरेक्शन है - मीठे बच्चे, देही-अभिमानी बनो। देही-अभिमानी बहुत शान्त रहते हैं उनके ख्यालात कभी उल्टे नहीं चल सकते।

*_धारणा:-_* सदा याद रहे - जो कर्म हम करेंगे हमको देख और करेंगे...... ऐसा आराम-पसन्द नहीं बनना है जो डिससर्विस हो। बहुत-बहुत निरहंकारी रहना है। अपने को आपेही मदद कर अपना कल्याण करना है।

_*वरदान:-*_ विल पावर द्वारा सेकण्ड में व्यर्थ को फुलस्टाप लगाने वाले अशरीरी भव

सेकण्ड में अशरीरी बनने का फाउन्डेशन - यह बेहद की वैराग्य वृत्ति है। यह वैराग्य ऐसी योग्य धरनी है उसमें जो भी डालो उसका फल फौरन निकलता है। तो अब ऐसी विल पावर हो जो संकल्प किया - व्यर्थ समाप्त, तो सेकण्ड में समाप्त हो जाए। जब चाहो, जहाँ चाहो, जिस स्थिति में चाहो सेकण्ड में सेट कर लो, सेवा खींचे नहीं। सेकण्ड में फुलस्टाप लग जाए तो सहज ही अशरीरी बन जायेंगे।

_*स्लोगन:-*_ बाप समान बनना है तो बिगड़ी को बनाने वाले बनो।
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*_03-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - तुम मात-पिता के सम्मुख आये हो, अपार सुख पाने, बाप तुम्हें घनेरे दु:खों से निकाल घनेरे सुखों में ले जाते हैं''*_

_*प्रश्नः-*_ एक बाप ही रिजर्व में रहते, पुनर्जन्म नहीं लेते हैं - क्यों?

_*उत्तर:-*_ क्योंकि कोई तो तुम्हें तमोप्रधान से सतोप्रधान बनाने वाला चाहिए। अगर बाप भी पुनर्जन्म में आये तो तुमको काले से गोरा कौन बनाये इसलिए बाप रिजर्व में रहता है।

*_धारणा:-_* सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान बुद्धि में रख ब्राह्मण सो देवता बनाने की सेवा करनी है। अपने ऊंचे भाग्य को कभी भूलना नहीं है।

_*वरदान:-*_ साधनों की प्रवृत्ति में रहते कमल फूल समान न्यारे और प्यारे रहने वाले बेहद के वैरागी भव

साधन मिले हैं तो उन्हें बड़े दिल से यूज़ करो, यह साधन हैं ही आपके लिए, लेकिन साधना को मर्ज नहीं करो। पूरा बैलेन्स हो। साधन बुरे नहीं हैं, साधन तो आपके कर्म का, योग का फल हैं। लेकिन साधन की प्रवृत्ति में रहते कमल पुष्प समान न्यारे और बाप के प्यारे बनो। यूज़ करते हुए उन्हों के प्रभाव में नहीं आओ। साधनों में बेहद की वैराग्य वृत्ति मर्ज न हो। पहले स्वयं में इसे इमर्ज करो फिर विश्व में वायुमण्डल फैलाओ।

_*स्लोगन:-*_ परेशान को अपनी शान में स्थित कर देना ही सबसे अच्छी सेवा है।
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*_02-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - तुम सबकी आपस में एक मत है, तुम अपने को आत्मा समझ एक बाप को याद करते हो तो सब भूत भाग जाते हैं''*_

_*प्रश्नः-*_ पद्मापद्म भाग्यशाली बनने का मुख्य आधार क्या है?

_*उत्तर:-*_ जो बाबा सुनाते हैं, उस एक-एक बात को धारण करने वाले ही पद्मापद्म भाग्यशाली बनते हैं। जज करो बाबा क्या कहते हैं और रावण सम्प्रदाय वाले क्या कहते हैं! बाप जो नॉलेज देते हैं उसे बुद्धि में रखना, स्वदर्शन चक्रधारी बनना ही पद्मापद्म भाग्यशाली बनना है। इस नॉलेज से ही तुम गुणवान बन जाते हो।

*_धारणा:-_* अभी वानप्रस्थ अवस्था है इसलिए बाप, टीचर के साथ-साथ सतगुरू को भी याद करना है। स्वीट होम में जाने के लिए आत्मा को सतोप्रधान (पावन) बनाना है।

_*वरदान:-*_ समय को शिक्षक बनाने के बजाए बाप को शिक्षक बनाने वाले मास्टर रचयिता भव

कई बच्चों को सेवा का उमंग है लेकिन वैराग्य वृत्ति का अटेन्शन नहीं है, इसमें अलबेलापन है। चलता है...होता है...हो जायेगा...समय आयेगा तो ठीक हो जायेगा...ऐसा सोचना अर्थात् समय को अपना शिक्षक बनाना। बच्चे बाप को भी दिलासा देते हैं - फिकर नहीं करो, समय पर ठीक हो जायेगा, कर लेंगे। आगे बढ़ जायेंगे। लेकिन आप मास्टर रचयिता हो, समय आपकी रचना है। रचना मास्टर रचयिता का शिक्षक बनें यह शोभा नहीं देता।

_*स्लोगन:-*_ बाप की पालना का रिटर्न है - स्व को और सर्व को परिवर्तन करने में सहयोगी बनना।
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*_01-10-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - हियर नो ईविल...... यहाँ तुम सतसंग में बैठे हो, तुम्हें मायावी कुसंग में नहीं जाना है, कुसंग लगने से ही संशय के रूप में घुटके आते हैं''*_

_*प्रश्नः-*_ इस समय किसी भी मनुष्य को स्प्रीचुअल नहीं कह सकते हैं - क्यों?

_*उत्तर:-*_ क्योंकि सभी देह-अभिमानी हैं। देह-अभिमान वाले स्प्रीचुअल कैसे कहला सकते हैं। स्प्रीचुअल फादर तो एक ही निराकार बाप है जो तुम्हें भी देही-अभिमानी बनने की शिक्षा देते हैं। सुप्रीम का टाइटिल भी एक बाप को ही दे सकते हैं, बाप के सिवाए सुप्रीम कोई भी कहला नहीं सकते।

*_धारणा:-_* बाबा का राइट हैण्ड बन बहुतों का कल्याण करना है। नर से नारायण बनने और बनाने का धन्धा करना है।

_*वरदान:-*_ चलन और चेहरे से पवित्रता के श्रृंगार की झलक दिखाने वाले श्रंगारी मूर्त भव

पवित्रता ब्राह्मण जीवन का श्रंगार है। हर समय पवित्रता के श्रंगार की अनुभूति चेहरे वा चलन से औरों को हो। दृष्टि में, मुख में, हाथों में, पांवों में सदा पवित्रता का श्रंगार प्रत्यक्ष हो। हर एक वर्णन करे कि इनके फीचर्स से पवित्रता दिखाई देती है। नयनों में पवित्रता की झलक है, मुख पर पवित्रता की मुस्कराहट है। और कोई बात उन्हें नज़र न आये - इसको ही कहते हैं - पवित्रता के श्रंगार से श्रंगारी हुई मूर्त।

_*स्लोगन:-*_ व्यर्थ सम्बन्ध-सम्पर्क भी एकाउन्ट को खाली कर देता है इसलिए व्यर्थ को समाप्त करो।
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*_30-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - सदा श्रीमत पर चलना - यही श्रेष्ठ पुरुषार्थ है, श्रीमत पर चलने से आत्मा का दीपक जग जाता है''*_

_*प्रश्नः-*_ पूरा-पूरा पुरुषार्थ कौन कर सकते हैं? ऊंच पुरुषार्थ क्या है?

_*उत्तर:-*_ पूरा पुरुषार्थ वही कर सकते जिनका अटेन्शन वा बुद्धियोग एक में है। सबसे ऊंचा पुरुषार्थ है बाप के ऊपर पूरा-पूरा कुर्बान जाना। कुर्बान जाने वाले बच्चे बाप को बहुत प्रिय लगते हैं।

*_धारणा:-_* क्रोध बहुत खराब है, यह स्वयं को जलाता है, क्रोध के वश होकर अवज्ञा नहीं करनी है। खुश रहना है और सबको खुश करने का पुरुषार्थ करना है।

_*वरदान:-*_ दिल की महसूसता से दिलाराम की आशीर्वाद प्राप्त करने वाले स्व परिवर्तक भव

स्व को परिवर्तन करने के लिए दो बातों की महसूसता सच्चे दिल से चाहिए 1- अपनी कमजोरी की महसूसता 2- जो परिस्थिति वा व्यक्ति निमित्त बनते हैं उनकी इच्छा और उनके मन की भावना की महसूसता। परिस्थिति के पेपर के कारण को जान स्वयं को पास होने के श्रेष्ठ स्वरूप की महसूसता हो कि स्वस्थिति श्रेष्ठ है, परिस्थिति पेपर है - यह महसूसता सहज परिवर्तन करा लेगी और सच्चे दिल से महसूस किया तो दिलाराम की आशीर्वाद प्राप्त होगी।

_*स्लोगन:-*_ वारिस वह है जो एवररेडी बन हर कार्य में जी हजूर हाजिर कहता है।
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*_29-09-2019 अव्यक्त 16-02-85 हिन्दी मुरली सार_*

_*हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है*_

आज के इस दिव्य दिवस की विशेष सौगात बापदादा सभी स्नेही बच्चों को दो गोल्डन बोल दे रहे हैं। एक सदा अपने को समझो-"मैं बाप का नूरे रत्न हूँ।'' नूरे रत्न अर्थात् सदा नयनों में समाया हुआ। नयनों में समाने का स्वरूप बिन्दी होता है। नयनों में बिन्दी की कमाल है। तो नूरे रत्न अर्थात् बिन्दु बाप में समाया हुआ हूँ। स्नेह में समाया हुआ हूँ। तो एक यह गोल्डन बोल याद रखना कि नूरे रत्न हूँ। दूसरा-"सदा बाप का साथ और हाथ मेरे ऊपर है।'' साथ भी है और हाथ भी है। सदा आशीर्वाद का हाथ है और सदा सह-योग का साथ है। तो सदा बाप का साथ और हाथ है ही है। साथ देना हाथ रखना नहीं है, लेकिन है ही। यह दूसरा गोल्डन बोल सदा साथ और सदा हाथ। यह आज के इस दिव्य जन्म की सौगात है।

_*वरदान:-*_ महसूसता की शक्ति द्वारा स्व परिवर्तन करने वाले तीव्र पुरुषार्थी भव

कोई भी परिवर्तन का सहज आधार महसूसता की शक्ति है। जब तक महसूसता की शक्ति नहीं आती तब तक अनुभूति नहीं होती और जब तक अनुभूति नहीं तब तक ब्राह्मण जीवन की विशेषता का फाउण्डेशन मजबूत नहीं। उमंग-उत्साह की चाल नहीं। जब महसूसता की शक्ति हर बात का अनुभवी बनाती है तब तीव्र पुरुषार्थी बन जाते हो। महसूसता की शक्ति सदाकाल के लिए सहज परिवर्तन करा देती है।

_*स्लोगन:-*_ स्नेह के स्वरूप को साकार में इमर्ज कर ब्रह्मा बाप समान बनो।
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*_28-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - बाप की श्रीमत पर चलकर अपना श्रृंगार करो, परचिन्तन से अपना श्रृंगार मत बिगाड़ो, टाइम वेस्ट न करो''*_

_*प्रश्नः-*_ तुम बच्चे बाप से भी तीखे जादूगर हो - कैसे?

_*उत्तर:-*_ यहाँ बैठे-बैठे तुम इन लक्ष्मी-नारायण जैसा अपना श्रृंगार कर रहे हो। यहाँ बैठे अपने आपको चेन्ज कर रहे हो, यह भी जादूगरी है। सिर्फ अल्फ को याद करने से तुम्हारा श्रृंगार हो जाता है। कोई हाथ-पांव चलाने की भी बात नहीं सिर्फ विचार की बात है। योग से तुम साफ, स्वच्छ और शोभनिक बन जाते हो, तुम्हारी आत्मा और शरीर कंचन बन जाता है, यह भी कमाल है ना।

*_धारणा:-_* अपने से पूछना है कि :-

_*(अ)*_ हम श्रीमत पर चलकर मनमनाभव की चाबी से अपना श्रृंगार ठीक कर रहे हैं?

_*(ब)*_ उल्टी सुल्टी बातें सुनकर वा सुनाकर श्रृंगार बिगाड़ते तो नहीं हैं?

_*(स)*_ आपस में प्रेम से रहते हैं? अपना वैल्युबुल टाइम कहीं पर वेस्ट तो नहीं करते हैं?

_*(द)*_ दैवी स्वभाव धारण किया है?

_*वरदान:-*_ स्व-परिवर्तन से विश्व परिवर्तन के कार्य में दिल-पसन्द सफलता प्राप्त करने वाले सिद्धि स्वरूप भव

हर एक स्व परिवर्तन द्वारा विश्व परिवर्तन करने की सेवा में लगे हुए हैं। सभी के मन में यही उमंग-उत्साह है कि इस विश्व को परिवर्तन करना ही है और निश्चय भी है कि परिवर्तन होना ही है। जहाँ हिम्मत है वहाँ उमंग-उत्साह है। स्व परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन के कार्य में दिलपसन्द सफलता प्राप्त होती है लेकिन यह सफलता तभी मिलती है जब एक ही समय वृत्ति, वायब्रेशन और वाणी तीनों शक्तिशाली हों।

_*स्लोगन:-*_ जब बोल में स्नेह और सयंम हो तब वाणी की एनर्जी जमा होगी।
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*_27-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - तुम सर्व आत्माओं को कर्मबन्धन से सैलवेज़ करने वाले सैलवेशन आर्मी हो, तुम्हें कर्म-बन्धन में नहीं फँसना है''*_

_*प्रश्नः-*_ कौन-सी प्रैक्टिस करते रहो तो आत्मा बहुत-बहुत शक्तिशाली बन जायेगी?

_*उत्तर:-*_ जब भी समय मिले तो शरीर से डिटैच होने की प्रैक्टिस करो। डिटैच होने से आत्मा में शक्ति वापिस आयेगी, उसमें बल भरेगा। तुम अण्डर-ग्राउण्ड मिलेट्री हो, तुम्हें डायरेक्शन मिलता है - अटेन्शन प्लीज़ अर्थात् एक बाप की याद में रहो, अशरीरी हो जाओ।

*_धारणा:-_* लाइट हाउस बन सबको शान्तिधाम, सुखधाम का रास्ता बताना है। सबकी नईया को दु:खधाम से निकालने की सेवा करनी है। अपना भी कल्याण करना है।

_*वरदान:-*_ इस अलौकिक जीवन में संबंध की शक्ति से अविनाशी स्नेह और सहयोग प्राप्त करने वाली श्रेष्ठ आत्मा भव

इस अलौकिक जीवन में संबंध की शक्ति आप बच्चों को डबल रूप में प्राप्त है। एक बाप द्वारा सर्व संबंध, दूसरा दैवी परिवार द्वारा संबंध। इस संबंध से सदा नि:स्वार्थ स्नेह, अविनाशी स्नेह और सहयोग सदा प्राप्त होता रहता है। तो आपके पास संबंध की भी शक्ति है। ऐसी श्रेष्ठ अलौकिक जीवन वाली शक्ति सम्पन्न वरदानी आत्मायें हो इसलिए अर्जी करने वाले नहीं, सदा राज़ी रहने वाले बनो।

_*स्लोगन:-*_ कोई भी प्लैन विदेही, साक्षी बन सोचो और सेकण्ड में प्लेन स्थिति बनाते चलो।
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*_26-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - तुम बाप के पास आये हो अपने कैरेक्टर्स सुधारने, तुम्हें अभी दैवी कैरेक्टर्स बनाने हैं''*_

_*प्रश्नः-*_ तुम बच्चों को ऑखें बन्द करके बैठने की मना क्यों की जाती है?

_*उत्तर:-*_ क्योंकि नज़र से निहाल करने वाला बाप तुम्हारे सम्मुख है। अगर ऑखें बन्द होंगी तो निहाल कैसे होंगे। स्कूल में ऑखें बन्द करके नहीं बैठते हैं। ऑखें बन्द होंगी तो सुस्ती आयेगी। तुम बच्चे तो स्कूल में पढ़ाई पढ़ रहे हो, यह सोर्स ऑफ इनकम है। लाखों पद्मों की कमाई हो रही है, कमाई में सुस्ती, उदासी नहीं आ सकती।

*_धारणा:-_* आत्मा रूपी बैटरी को सतोप्रधान बनाने के लिए चलते-फिरते याद की यात्रा में रहना है। दैवी कैरेक्टर्स धारण करने हैं। बहुत-बहुत मीठा बनना है।

_*वरदान:-*_ ज्ञान धन द्वारा प्रकृति के सब साधन प्राप्त करने वाले पदमा-पदमपति भव

ज्ञान धन स्थूल धन की प्राप्ति स्वत: कराता है। जहाँ ज्ञान धन है वहाँ प्रकृति स्वत: दासी बन जाती है। ज्ञान धन से प्रकृति के सब साधन स्वत: प्राप्त हो जाते हैं इसलिए ज्ञान धन सब धन का राजा है। जहाँ राजा है वहाँ सर्व पदार्थ स्वत: प्राप्त होते हैं। यह ज्ञान धन ही पदमा-पदमपति बनाने वाला है, परमार्थ और व्यवहार को स्वत: सिद्ध करता है। ज्ञान धन में इतनी शक्ति है जो अनेक जन्मों के लिए राजाओं का राजा बना देती है।

_*स्लोगन:-*_"कल्प-कल्प का विजयी हूँ'' - यह रूहानी नशा इमर्ज हो तो मायाजीत बन जायेंगे।
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*_25-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - माया को वश करने का मंत्र है मन्मनाभव, इसी मंत्र में सब खूबियां समाई हुई हैं, यही मंत्र तुम्हें पवित्र बना देता है''*_

_*प्रश्नः-*_ आत्मा की सेफ्टी का नम्बरवन साधन कौन-सा है और कैसे?

_*उत्तर:-*_ याद की यात्रा ही सेफ्टी का नम्बरवन साधन है क्योंकि इस याद से ही तुम्हारे कैरेक्टर सुधरते हैं। तुम माया पर जीत पा लेते हो। याद से पतित कर्मेन्द्रियां शान्त हो जाती हैं। याद से ही बल आता है। ज्ञान तलवार में याद का जौहर चाहिए। याद से ही मीठे सतोप्रधान बनेंगे। कोई को भी नाराज़ नहीं करेंगे इसलिए याद की यात्रा में कमज़ोर नहीं बनना है। अपने आपसे पूछना है कि हम कहाँ तक याद में रहते हैं?

*_धारणा:-_* सदा इसी नशे में रहना है कि अभी हम संगमयुगी हैं, कलियुगी नहीं। बाप हमें नये विश्व का मालिक बनाने के लिए पढ़ा रहे हैं। अशुद्ध ख्यालात समाप्त कर देने हैं।

_*वरदान:-*_ श्रेष्ठ संकल्प की शक्ति द्वारा सिद्धियां प्राप्त करने वाले सिद्धि स्वरूप भव

आप मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चों के संकल्प में इतनी शक्ति है जो जिस समय चाहो वह कर सकते हो और करा भी सकते हो क्योंकि आपका संकल्प सदा शुभ, श्रेष्ठ और कल्याणकारी है। जो श्रेष्ठ और कल्याण का संकल्प है वह सिद्ध जरूर होता है। मन सदा एकाग्र अर्थात् एक ठिकाने पर स्थित रहता है, भटकता नहीं है। जहाँ चाहे जब चाहे मन को वहाँ स्थित कर सकते हैं। इससे सिद्धि स्वरूप स्वत: बन जाते हैं।

_*स्लोगन:-*_ परिस्थितियों की हलचल के प्रभाव से बचना है तो विदेही स्थिति में रहने का अभ्यास करो।
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*_24-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - योगबल से बुरे संस्कारों को परिवर्तन कर स्वयं में अच्छे संस्कार डालो। ज्ञान और पवित्रता के संस्कार अच्छे संस्कार हैं''*_

_*प्रश्नः-*_  तुम बच्चों का बर्थ राइट कौन-सा है? तुम्हें अभी कौन-सी फीलिंग आती है?

_*उत्तर:-*_  तुम्हारा बर्थ राइट है मुक्ति और जीवनमुक्ति। तुम्हें अब फीलिंग आती है कि हमें बाप के साथ वापिस घर जाना है। तुम जानते हो - बाप आये हैं भक्ति का फल मुक्ति और जीवन मुक्ति देने। अभी सबको शान्तिधाम जाना है। सबको अपने घर का दीदार करना है।

*_धारणा:-_* सदा खुशी में रहने के लिए बाप जो रोज़ गुह्य-गुह्य बातें सुनाते हैं, उन्हें सुनना और दूसरों को सुनाना है। किसी भी बात में मूँझना नहीं है। युक्ति से उत्तर देना है। लज्जा नहीं करनी है।

_*वरदान:-*_ स्वमान की सीट पर स्थित हो शक्तियों को आर्डर प्रमाण चलाने वाले विशाल बुद्धि भव

अपनी विशाल बुद्धि द्वारा सर्व शक्तियों रूपी सेवाधारियों को समय पर कार्य में लगाओ। जो भी टाइटल डायरेक्ट परमात्मा द्वारा मिले हुए हैं, उसके नशे में रहो। स्वमान की स्थिति रूपी सीट पर सेट रहो तो सर्व शक्तियां सेवा के लिए सदा हाज़िर अनुभव होंगी। आपके आर्डर के इन्तजार में होगी। तो वरदान और वर्से को कार्य में लगाओ। मालिक बन, योगयुक्त बन युक्तियुक्त सेवा सेवाधारियों से लो तो सदा राज़ी रहेंगे। बार-बार अर्जी नहीं डालेंगे।

_*स्लोगन:-*_ कोई भी कार्य शुरू करने के पहले विशेष यह स्मृति इमर्ज करो कि सफलता मुझ श्रेष्ठ ब्राह्मण आत्मा का जन्म सिद्ध अधिकार है।
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*_23-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - ज्ञान का तीसरा नेत्र सदा खुला रहे तो खुशी में रोमांच खड़े हो जायेंगे, खुशी का पारा सदा चढ़ा रहेगा''*_

_*प्रश्नः-*_ इस समय मनुष्यों की नज़र बहुत कमज़ोर है इसलिए उनको समझाने की युक्ति क्या है?

_*उत्तर:-*_ बाबा कहते उनके लिए तुम ऐसे-ऐसे बड़े चित्र बनाओ जो वह दूर से ही देखकर समझ जाएं। यह गोले का (सृष्टि चक्र का) चित्र तो बहुत बड़ा होना चाहिए। यह है अन्धों के आगे आइना।*_

अपना टाइम विनाशी कमाई के पीछे अधिक वेस्ट नहीं करना है क्योंकि यह तो सब मिट्टी में मिल जाना है इसलिए बेहद के बाप से बेहद का वर्सा लेना है और दैवीगुण भी धारण करने हैं।

_*वरदान:-*_ अथॉरिटी बन समय पर सर्वशक्तियों को कार्य में लगाने वाले मास्टर सर्वशक्तिवान भव

सर्वशक्तिवान बाप द्वारा जो सर्वशक्तियां प्राप्त हैं वह जैसी परिस्थिति, जैसा समय और जिस विधि से आप कार्य में लगाने चाहो वैसे ही रूप से यह शक्तियां आपके सहयोगी बन सकती हैं। इन शक्तियों को वा प्रभु-वरदान को जिस रूप में चाहो वह रूप धारण कर सकती हैं। अभी-अभी शीतलता के रूप में, अभी-अभी जलाने के रूप में। सिर्फ समय पर कार्य में लगाने की अथॉरिटी बनो। यह सर्वशक्तियां तो आप मास्टर सर्वशक्तिवान की सेवाधारी हैं।

_*स्लोगन:-*_ स्व पुरुषार्थ वा विश्व कल्याण के कार्य में जहाँ हिम्मत है वहाँ सफलता हुई पड़ी है।
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*_22-09-2019 अव्यक्त 30-01-1985 हिन्दी मुरली सार_*

_*माया जीत और प्रकृति जीत ही स्वराज्य-अधिकारी*_

ऐसे यह 5 तत्व सेवाधारी बन जायेंगे। लेकिन किसके बनेंगे? स्वराज्य अधिकारी आत्माओं के सेवाधारी बनेंगे। तो अभी अपने को देखो 5 ही विकार दुश्मन से बदल सेवाधारी बने हैं? तब ही स्वराज्य अधिकारी कहलायेंगे। क्रोध अग्नि योग अग्नि में बदल जाए। ऐसे लोभ विकार, लोभ अर्थात् चाहना। हद की चाहना बदल शुभ चाहना हो जाए कि मैं सदा हर संकल्प से, बोल से, कर्म से निरस्वार्थ बेहद सेवाधारी बन जाऊं। मैं बाप समान बन जाऊं-ऐसे शुभ चाहना अर्थात् लोभ का परिवर्तन स्वरूप। दुश्मन के बजाए सेवा के कार्य में लगाओ। मोह तो सभी को बहुत है ना। बापदादा में तो मोह है ना। एक सेकेण्ड भी दूर न हो- यह मोह हुआ ना! लेकिन यह मोह सेवा कराता है। जो भी आपके नयनों में देखे तो नयनों में समाये हुए बाप को देखे। जो भी बोलेंगे मुख द्वारा बाप के अमूल्य बोल सुनायेंगे। तो मोह विकार भी सेवा में लग गया ना। बदल गया ना। ऐसे ही अहंकार। देह-अभिमान से देही-अभिमानी बन जाते। शुभ अहंकार अर्थात् मैं आत्मा विशेष आत्मा बन गई। पदमा पदम भाग्यशाली बन गई। बेफिकर बादशाह बन गई। यह शुभ अहंकार अर्थात् ईश्वरीय नशा सेवा के निमित्त बन जाता है। तो ऐसे पाँचों ही विकार बदल सेवा का साधन बन जाऍ तो दुश्मन से सेवाधारी हो गये ना! तो ऐसे चेक करो मायाजीत प्रकृति जीत कहाँ तक बने हैं? राजा तब बनेंगे जब पहले दास-दासियाँ तैयार हों। जो स्वयं दास के अधीन होगा वह राज्य अधिकारी कैसे बनेगा!

_*वरदान:-*_ आत्मिक शक्ति के आधार पर तन की शक्ति का अनुभव करने वाले सदा स्वस्थ भव

इस अलौकिक जीवन में आत्मा और प्रकृति दोनों की तन्दरूस्ती आवश्यक है। जब आत्मा स्वस्थ है तो तन का हिसाब-किताब वा तन का रोग सूली से कांटा बनने के कारण, स्व-स्थिति के कारण स्वस्थ अनुभव करते हैं। उनके मुख पर चेहरे पर बीमारी के कष्ट के चिन्ह नहीं रहते। कर्मभोग के वर्णन के बदले कर्मयोग की स्थिति का वर्णन करते हैं। वे परिवर्तन की शक्ति से कष्ट को सन्तुष्टता में परिवर्तन कर सन्तुष्ट रहते और सन्तुष्टता की लहर फैलाते हैं।

_*स्लोगन:-*_दिल से, तन से, आपसी प्यार से सेवा करो तो सफलता निश्चित मिलेगी।
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*_21-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - तुम्हारी यह पढ़ाई सोर्स ऑफ इनकम है, इस पढ़ाई से 21 जन्मों के लिए कमाई का प्रबन्ध हो जाता है''*_

_*प्रश्नः-*_ मुक्तिधाम में जाना कमाई है या घाटा?

_*उत्तर:-*_ भक्तों के लिए यह भी कमाई है क्योंकि आधाकल्प से शान्ति-शान्ति मांगते आये हैं। बहुत मेहनत के बाद भी शान्ति नहीं मिली। अब बाप द्वारा शान्ति मिलती है अर्थात् मुक्तिधाम में जाते हैं तो यह भी आधाकल्प की मेहनत का फल हुआ इसलिए इसे भी कमाई कहेंगे, घाटा नहीं। तुम बच्चे तो जीवन-मुक्ति में जाने का पुरूषार्थ करते हो। तुम्हारी बुद्धि में अभी सारे वर्ल्ड की हिस्ट्री-जाग्रॉफी नाच रही है।

*_धारणा:-_* ज्ञान की धारणा से अपनी बैटरी भरनी है। ज्ञान रत्नों से स्वयं को धनवान बनाना है। अभी कमाई का समय है इसलिए घाटे से बचना है।

_*वरदान:-*_ बाप और वरदाता इस डबल सम्बन्ध से डबल प्राप्ति करने वाले सदा शक्तिशाली आत्मा भव

सर्व शक्तियां बाप का वर्सा और वरदाता का वरदान हैं। बाप और वरदाता - इस डबल संबंध से हर एक बच्चे को यह श्रेष्ठ प्राप्ति जन्म से ही होती है। जन्म से ही बाप बालक सो सर्व शक्तियों का मालिक बना देता है। साथ-साथ वरदाता के नाते से जन्म होते ही मास्टर सर्वशक्तिवान बनाए "सर्वशक्ति भव'' का वरदान दे देता है। तो एक द्वारा यह डबल अधिकार मिलने से सदा शक्तिशाली बन जाते हो।

_*स्लोगन:-*_ देह और देह के साथ पुराने स्वभाव, संस्कार वा कमजोरियों से न्यारा होना ही विदेही बनना है।
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*_20-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*मीठे बच्चे - "तुम्हें यहाँ प्रवृत्ति मार्ग का लव मिलता है क्योंकि बाप दिल से कहते हैं - मेरे बच्चे, बाप से वर्सा मिलता है, यह लव देहधारी गुरू नहीं दे सकते''*_

_*प्रश्नः-*_ जिन बच्चों की बुद्धि में ज्ञान की धारणा है, शुरूड बुद्धि हैं - उनकी निशानी क्या होगी?

_*उत्तर:-*_ उन्हें दूसरों को सुनाने का शौक होगा। उनकी बुद्धि मित्र-सम्बन्धियों आदि में भटकेगी नहीं। शुरूड बुद्धि जो होते हैं, वह पढ़ाई में कभी उबासी आदि नहीं लेंगे। स्कूल में कभी आंखें बन्द करके नहीं बैठेंगे। जो बच्चे तवाई होकर बैठते, जिनकी बुद्धि इधर-उधर भटकती रहती, वह ज्ञान को समझते ही नहीं, उनके लिए बाप को याद करना बड़ा मुश्किल है।

*_धारणा:-_* पढ़ाई पर पूरा अटेन्शन देना है। स्कूल में आंखे बन्द करके बैठना - यह कायदा नहीं है। ध्यान रहे - पढ़ाई के समय बुद्धि, इधर-उधर न भटके, उबासी न आये। जो सुनते जाएं वह धारण होता जाए।

_*वरदान:-*_ समय प्रमाण स्वयं को चेक कर चेन्ज करने वाले सदा विजयी श्रेष्ठ आत्मा भव

जो सच्चे राजयोगी हैं वह कभी किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं हो सकते। तो अपने को समय प्रमाण इसी रीति से चेक करो और चेक करने के बाद चेंज कर लो। सिर्फ चेक करेंगे तो दिलशिकस्त हो जायेंगे। सोचेंगे कि हमारे में यह भी कमी है, पता नहीं ठीक होगा या नहीं इसलिए चेक करो और चेंज करो क्योंकि समय प्रमाण कर्तव्य करने वालों की सदा विजय होती है इसलिए सदा विजयी श्रेष्ठ आत्मा बन तीव्र पुरुषार्थ द्वारा नम्बरवन में आ जाओ।

_*स्लोगन:-*_ मन-बुद्धि को कन्ट्रोल करने का अभ्यास हो तब सेकण्ड में विदेही बन सकेंगे।
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*_19-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - तुम बेहद के बाप पास आये हो विकारी से निर्विकारी बनने, इसलिए तुम्हारे में कोई भी भूत नहीं होना चाहिए''*_

_*प्रश्नः-*_ बाप अभी तुम्हें ऐसी कौन-सी पढ़ाई पढ़ाते हैं जो सारे कल्प में नहीं पढ़ाई जाती?

_*उत्तर:-*_ नई राजधानी स्थापन करने की पढ़ाई, मनुष्य को राजाई पद देने की पढ़ाई इस समय सुप्रीम बाप ही पढ़ाते हैं। यह नई पढ़ाई सारे कल्प में नहीं पढ़ाई जाती। इसी पढ़ाई से सतयुगी राजधानी स्थापन हो रही है।

*_धारणा:-_* अन्दर में काम, क्रोध आदि के जो भी भूत प्रवेश हैं, उन्हें निकालना है। एम ऑबजेक्ट को सामने रखकर पुरूषार्थ करना है।

_*वरदान:-*_ महसूसता शक्ति द्वारा पुराने स्वभाव, संस्कार से न्यारा बनने वाले मायाजीत भव

इस पुरानी देह के स्वभाव और संस्कार बहुत कड़े हैं जो मायाजीत बनने में बड़ा विघ्न रूप बनते हैं। स्वभाव-संस्कार रूपी सांप खत्म भी हो जाता है लेकिन लकीर रह जाती है जो समय आने पर बार-बार धोखा दे देती है। कई बार माया के इतना वशीभूत हो जाते जो रांग को रांग भी नहीं समझते। परवश हो जाते हैं इसलिए चेक करो और महसूसता शक्ति द्वारा पुराने छिपे हुए स्वभाव संस्कार से न्यारे बनो तब मायाजीत बनेंगे।

_*स्लोगन:-*_ विदेहीपन का अभ्यास करो - यही अभ्यास अचानक के पेपर में पास करायेगा।
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*_18-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - तुम्हें किसी भी पतित देहधारियों से प्यार नहीं रखना है क्योंकि तुम पावन दुनिया में जा रहे हो, एक बाप से प्यार करना है''*_

_*प्रश्नः-*_ तुम बच्चों को किस चीज़ से तंग नहीं होना है और क्यों?

_*उत्तर:-*_ तुम्हें अपने इस पुराने शरीर से ज़रा भी तंग नहीं होना है क्योंकि यह शरीर बहुत-बहुत वैल्युबुल है। आत्मा इस शरीर में बैठ बाप को याद करके बहुत बड़ी लॉटरी ले रही है। बाप की याद में रहेंगे तो खुशी की खुराक मिलती रहेगी।

*_धारणा:-_* ऊंच पद पाने के लिए टीचर बनकर बहुतों की सेवा करनी है। कमल फूल समान पवित्र रह आपसमान बनाना है। कांटों को फूल बनाना है।

_*वरदान:-*_ सहज योग की साधना द्वारा साधनों पर विजय प्राप्त करने वाले प्रयोगी आत्मा भव

साधनों के होते, साधनों को प्रयोग में लाते योग की स्थिति डगमग न हो। योगी बन प्रयोग करना इसको कहते हैं न्यारा। होते हुए निमित्त मात्र, अनासक्त रूप से प्रयोग करो। अगर इच्छा होगी तो वह इच्छा अच्छा बनने नहीं देगी। मेहनत करने में ही समय बीत जायेगा। उस समय आप साधना में रहने का प्रयत्न करेंगे और साधन अपनी तरफ आकर्षित करेंगे इसलिए प्रयोगी आत्मा बन सहजयोग की साधना द्वारा साधनों के ऊपर अर्थात् प्रकृति पर विजयी बनो।

_*स्लोगन:-*_ मेरे पन के अनेक रिश्तों को समाप्त करना ही फरिश्ता बनना है।
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*_17-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

*"मीठे बच्चे - जैसे तुम्हें निश्चय है कि ईश्वर सर्वव्यापी नहीं, वह हमारा बाप है, ऐसे दूसरों को समझाकर निश्चय कराओ फिर उनसे ओपीनियन लो''*_

_*प्रश्नः-*_ बाप अपने बच्चों से कौन सी बात पूछते हैं, जो दूसरा कोई नहीं पूछ सकता है?

_*उत्तर:-*_ बाबा जब बच्चों से मिलते हैं तो पूछते हैं - बच्चे, पहले तुम कब मिले हो? जो बच्चे समझे हुए हैं वह झट कहते हैं - हाँ बाबा, हम 5 हज़ार वर्ष पहले आपसे मिले थे। जो नहीं समझते हैं, वह मूँझ जाते हैं। ऐसा प्रश्न पूछने का अक्ल दूसरे किसी को आयेगा भी नहीं। बाप ही तुम्हें सारे कल्प का राज़ समझाते हैं।

*_धारणा:-_* पुरानी दुनिया बदल रही है इसलिए इससे ममत्व निकाल देना है, इसे देखते हुए भी नहीं देखना है। बुद्धि नई दुनिया में लगानी है।

_*वरदान:-*_ सर्व पदार्थो की आसक्तियों से न्यारे अनासक्त, प्रकृतिजीत भव

अगर कोई भी पदार्थ कर्मेन्द्रियों को विचलित करता है अर्थात् आसक्ति का भाव उत्पन्न होता है तो भी न्यारे नहीं बन सकेंगे। इच्छायें ही आसक्तियों का रूप हैं। कई कहते हैं इच्छा नहीं है लेकिन अच्छा लगता है। तो यह भी सूक्ष्म आसक्ति है - इसकी महीन रूप से चेकिंग करो कि यह पदार्थ अर्थात् अल्पकाल सुख के साधन आकर्षित तो नहीं करते हैं? यह पदार्थ प्रकृति के साधन हैं, जब इनसे अनासक्त अर्थात् न्यारे बनेंगे तब प्रकृतिजीत बनेंगे।

_*स्लोगन:-*_ मेरे-मेरे के झमेलों को छोड़ बेहद में रहो तब कहेंगे विश्व कल्याणकारी।
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*_16-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - अपनी बैटरी चार्ज करने का ख्याल करो, अपना टाइम परचिंतन में वेस्ट मत करो, अपनी घोट तो नशा चढ़े''*_

_*प्रश्नः-*_ ज्ञान एक सेकेण्ड का होते हुए भी बाप को इतना डिटेल से समझाने वा इतना समय देने की आवश्यकता क्यों?

_*उत्तर:-*_ क्योंकि ज्ञान देने के बाद बच्चों में सुधार हुआ है या नहीं, यह भी बाप देखते हैं और फिर सुधारने के लिए ज्ञान देते ही रहते हैं। सारे बीज और झाड़ का ज्ञान देते हैं, जिस कारण उन्हें ज्ञान सागर कहा जाता। अगर एक सेकण्ड का मंत्र देकर चले जाएं तो ज्ञान सागर का टाइटिल भी न मिले।

*_धारणा:-_* नर से नारायण बनने के लिए अन्तकाल में एक बाप की ही याद रहे। इस हाइएस्ट युक्ति को सामने रखते हुए पुरूषार्थ करना है - मैं आत्मा हूँ। इस शरीर को भूल जाना है।

_*वरदान:-*_ देह-भान से न्यारे बन परमात्म प्यार का अनुभव करने वाले कमल आसनधारी भव

कमल आसन ब्राह्मण आत्माओं के श्रेष्ठ स्थिति की निशानी है। ऐसी कमल आसनधारी आत्मायें इस देहभान से स्वत: न्यारी रहती हैं। उन्हें शरीर का भान अपनी तरफ आकर्षित नहीं करता। जैसे ब्रह्मा बाप को चलते फिरते फरिश्ता रूप वा देवता रूप सदा स्मृति में रहा। ऐसे नेचुरल देही-अभिमानी स्थिति सदा रहे इसको कहते हैं देह-भान से न्यारे। ऐसे देह-भान से न्यारे रहने वाले ही परमात्म प्यारे बन जाते हैं।

_*स्लोगन:-*_ आपकी विशेषतायें वा गुण प्रभु प्रसाद हैं, उन्हें मेरा मानना ही देह-अभिमान है।
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*_15-09-2019 अव्यक्त 28-01-1985 हिन्दी मुरली सार_*

_*विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा*_

मन्सा शक्ति किसी आत्मा की मानसिक हलचल वाली स्थिति को भी अचल बना सकती है। मानसिक शक्ति अर्थात् शुभ भावना, श्रेष्ठ कामना इस श्रेष्ठ भावना द्वारा किसी भी आत्मा को, संशय बुद्धि को भावनात्मक बुद्धि बना सकते हैं। इस श्रेष्ठ भावना से किसी भी आत्मा का व्यर्थ भाव परिवर्तन कर समर्थ भाव बना सकते हैं। श्रेष्ठ भाव द्वारा किसी भी आत्मा के स्वभाव को भी बदल सकते हैं। श्रेष्ठ भावना की शक्ति द्वारा आत्मा को भावना के फल की अनुभूति करा सकते हैं। श्रेष्ठ भावना द्वारा भगवान के समीप ला सकते हैं। श्रेष्ठ भावना किसी आत्मा की भाग्य की रेखा बदल सकती है। श्रेष्ठ भावना हिम्मतहीन आत्मा को हिम्मतवान बना देती है। इसी श्रेष्ठ भावना की विधि प्रमाण मन्सा सेवा किसी भी आत्मा की कर सकते हो। मन्सा सेवा वर्तमान समय के प्रमाण अति आवश्यक है। लेकिन मन्सा सेवा वही कर सकता है जिसकी स्वयं की मन्सा अर्थात् संकल्प सदा सर्व के प्रति श्रेष्ठ हो, नि:स्वार्थ हो।

_*वरदान:-*_ ईश्वरीय सेवा के बंधन द्वारा समीप संबंध में आने वाले रॉयल फैमिली के अधिकारी भव

ईश्वरीय सेवा का बंधन नजदीक सम्बन्ध में लाने वाला है। जितनी जो सेवा करता है उतना सेवा का फल समीप सम्बन्ध में आता है। यहाँ के सेवाधारी वहाँ की रॉयल फैमिली के अधिकारी बनेंगे। जितनी यहाँ हार्ड सेवा करते उतना वहाँ आराम से सिंहासन पर बैठेंगे और यहाँ जो आराम करते हैं वह वहाँ काम करेंगे। एक-एक सेकण्ड का, एक एक काम का हिसाब-किताब बाप के पास है।

_*स्लोगन:-*_ स्व परिवर्तन द्वारा विश्व परिवर्तन का वायब्रेशन तीव्रगति से फैलाओ।
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*_14-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - जब तुम नम्बरवार सतोप्रधान बनेंगे तब यह नैचुरल कैलेमिटीज़ वा विनाश का फोर्स बढ़ेगा और यह पुरानी दुनिया समाप्त होगी''*_

_*प्रश्नः-*_ कौन-सा पुरूषार्थ करने वालों को बाप का पूरा वर्सा प्राप्त होता है?

_*उत्तर:-*_ पूरा वर्सा लेना है तो पहले बाप को अपना वारिस बनाओ अर्थात् जो कुछ तुम्हारे पास है, वह सब बाप पर बलिहार करो। बाप को अपना बच्चा बना लो तो पूरे वर्से के अधिकारी बन जायेंगे।

*_धारणा:-_* बुद्धि में सारा ज्ञान रख, बन्धनमुक्त बन दूसरों की सर्विस करनी है। बाप से सच्चा सौदा करना है। जैसे बाप ने सब कुछ गुप्त किया, ऐसे गुप्त दान करना है।

_*वरदान:-*_ निमित्त और निर्माण भाव से सेवा करने वाले श्रेष्ठ सफलतामूर्त भव

सेवाधारी अर्थात् सदा बाप समान निमित्त बनने और निर्माण रहने वाले। निर्माणता ही श्रेष्ठ सफलता का साधन है। किसी भी सेवा में सफलता प्राप्त करने के लिए नम्रता भाव और निमित्त भाव धारण करो, इससे सेवा में सदा मौज का अनुभव करेंगे। सेवा में कभी थकावट नहीं होगी। कोई भी सेवा मिले लेकिन इन दो विशेषताओं से सफलता को पाते सफलता स्वरूप बन जायेंगे।

_*स्लोगन:-*_ सेकण्ड में विदेही बनने का अभ्यास हो तो सूर्यवंशी में आ जायेंगे।
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*_13-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - याद की मेहनत तुम सबको करनी है, तुम अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो तो मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा''*_

_*प्रश्नः-*_ सर्व की सद्गति का स्थान कौन-सा है, जिसके महत्व का सारी दुनिया को पता चलेगा?

_*उत्तर:-*_ आबू भूमि है सबकी सद्गति का स्थान। तुम ब्रह्माकुमारीज़ के सामने ब्रैकेट में लिख सकते हो यह सर्वोत्तम तीर्थ स्थान है। सारे दुनिया की सद्गति यहाँ से होनी है। सर्व का सद्गति दाता बाप और आदम (ब्रह्मा) यहाँ पर बैठकर सबकी सद्गति करते हैं। आदम अर्थात् आदमी, वह देवता नहीं है। उसे भगवान् भी नहीं कह सकते।

*_धारणा:-_* हर एक की अवस्था और योग में रात-दिन का फर्क है इसलिए अलग-अलग होकर बैठना है। अंग, अंग से न लगे। पुण्य आत्मा बनने के लिए याद की मेहनत करनी है।

_*वरदान:-*_ याद और सेवा के बैलेन्स द्वारा बाप की मदद का अनुभव करने वाले ब्लैसिंग की पात्र आत्मा भव

जहाँ याद और सेवा का बैलेन्स अर्थात् समानता है वहाँ बाप की विशेष मदद अनुभव होती है। यह मदद ही आशीर्वाद है क्योंकि बापदादा अन्य आत्माओं के मुआफिक आशीर्वाद नहीं देते। बाप तो है ही अशरीरी, तो बापदादा की आशीर्वाद है सहज, स्वत: मदद मिलना जिससे जो असम्भव बात है वह सम्भव हो जाए। यही मदद अर्थात् आशीर्वाद है। ऐसी आशीर्वाद की पात्र आत्मायें हो जो एक कदम में पदमों की कमाई जमा हो जाती है।

_*स्लोगन:-*_ सकाश देने के लिए अविनाशी सुख, शान्ति वा सच्चे प्यार का स्टाक जमा करो।
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*_13-09-2019 हिन्दी मुरली सार_*

_*"मीठे बच्चे - याद की मेहनत तुम सबको करनी है, तुम अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो तो मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा''*_

_*प्रश्नः-*_ सर्व की सद्गति का स्थान कौन-सा है, जिसके महत्व का सारी दुनिया को पता चलेगा?

_*उत्तर:-*_ आबू भूमि है सबकी सद्गति का स्थान। तुम ब्रह्माकुमारीज़ के सामने ब्रैकेट में लिख सकते हो यह सर्वोत्तम तीर्थ स्थान है। सारे दुनिया की सद्गति यहाँ से होनी है। सर्व का सद्गति दाता बाप और आदम (ब्रह्मा) यहाँ पर बैठकर सबकी सद्गति करते हैं। आदम अर्थात् आदमी, वह देवता नहीं है। उसे भगवान् भी नहीं कह सकते।

*_धारणा:-_* हर एक की अवस्था और योग में रात-दिन का फर्क है इसलिए अलग-अलग होकर बैठना है। अंग, अंग से न लगे। पुण्य आत्मा बनने के लिए याद की मेहनत करनी है।

_*वरदान:-*_ याद और सेवा के बैलेन्स द्वारा बाप की मदद का अनुभव करने वाले ब्लैसिंग की पात्र आत्मा भव

जहाँ याद और सेवा का बैलेन्स अर्थात् समानता है वहाँ बाप की विशेष मदद अनुभव होती है। यह मदद ही आशीर्वाद है क्योंकि बापदादा अन्य आत्माओं के मुआफिक आशीर्वाद नहीं देते। बाप तो है ही अशरीरी, तो बापदादा की आशीर्वाद है सहज, स्वत: मदद मिलना जिससे जो असम्भव बात है वह सम्भव हो जाए। यही मदद अर्थात् आशीर्वाद है। ऐसी आशीर्वाद की पात्र आत्मायें हो जो एक कदम में पदमों की कमाई जमा हो जाती है।

_*स्लोगन:-*_ सकाश देने के लिए अविनाशी सुख, शान्ति वा सच्चे प्यार का स्टाक जमा करो।
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